rasakhaan ka jeevan parichay


Category : jivan parichay 19/06/20


rasakhaan ka jeevan parichay

प्रश्न : रसखान का जीवन परिचय देते हुए उनकी रचनाओं को स्पष्ट कीजिए। [2010] 

कवि 'रसखान का जीवन परिचय' दीजिए तथा उनकी एक रचना का नाम लिखिए। [2011, 12, 13, 14, 15, 17]

उत्तर : हिन्दी काव्य की श्रीवृद्धि न जाने कितने ही मुसलमान कवियों के द्वारा की गयी, किन्तु इन सभी कवियों में रसखान जैसा सुकोमल, सरस और ललित काव्य किसी का भी नहीं है। इन्हें अत्यधिक भावुक कविहृदय मिला था, जिसके कारण ये श्रीकृष्ण के दीवाने हो गये थे। इनके हृदय से निकला हुआ समस्त काव्य रस और भाव से आकुल कर देने वाला है। कृष्ण-भक्ति शाखा के ये अद्वितीय कवि माने जाते हैं।

रसखान का जीवन परिचय -

रसखान दिल्ली के पठान सरदार थे। इनका पूरा नाम सैयद इब्राहीम रसखान था। इनके द्वारा रचित 'प्रेम वाटिका' ग्रन्थ से यह संकेत प्राप्त होता है कि ये दिल्ली के राजवंश में उत्पन्न हुए थे और इनका रचना-काल जहाँगीर का राज्य-काल था। इनका जन्म सन् 1558 ई० (सं० 1615 वि०) के लगभग दिल्ली में हुआ था।

'हिन्दी-साहित्य का प्रथम इतिहास के अनुसार इनका जन्म सन् 1533 ई० में पिहानी, जिला हरदोई (उ०प्र०) में हुआ था। हरदोई में सैयदों की बस्ती भी है। डॉ० नगेन्द्र ने भी अपने 'हिन्दी-साहित्य के इतिहास में इनका जन्म सन् 1533 ई० के आस-पास ही स्वीकार किया है।

ऐसा माना जाता है कि इन्होंने दिल्ली में कोई विप्लव होता देखा, जिससे व्यथित होकर ये गोवर्धन चले आये और यहाँ आकर श्रीनाथ की शरणागत हुए। इनकी रचनाओं से यह प्रमाणित होता है कि ये पहले रसिक-प्रेमी थे, बाद में अलौकिक प्रेम की ओर आकृष्ट हुए और कृष्णभक्त बन गये। गोस्वामी बिट्ठलनाथ ने पुष्टिमार्ग में इन्हें दीक्षा प्रदान की थी।

इनका अधिकांश जीवन ब्रजभूमि में व्यतीत हुआ। यही कारण है कि ये कंचन धाम को भी वृन्दावन के करील-कुंजों पर न्योछावर करने और अपने अगले जन्मों में ब्रज में शरीर धारण करने की कामना करते थे। कृष्णभक्त कवि रसखान की मृत्यु सन् 1618 ई० (सं० 1675 वि०) के लगभग हुई।

कृतियाँ (रचनाएँ)-

रसखान की निम्नलिखित दो रचनाएँ प्रसिद्ध हैं

(1) सुजान रसखान-इसकी रचना कवित्त और सवैया छन्दों में की गयी है। यह भक्ति और प्रेमविषयक मुक्तक काव्य है। इसमें 139 भावपूर्ण छन्द हैं।

(2) प्रेमवाटि का- इसमें 25 दोहों में प्रेम के त्यागमय और निष्काम स्वरूप का काव्यात्मक वर्णन है। तथा प्रेम का पूर्ण परिपाक हुआ है।

साहित्य में स्थान-

रसखान का स्थान भक्त- कवियों में विशेष महत्त्वपूर्ण है। इनके बारे में डॉ. विजयेन्द्र स्नातक ने लिखा है कि “इनकी भक्ति हृदय की मुक्त साधना है और इनका श्रृंगार वर्णन भावुक हृदय की उन्मुक्त अभिव्यक्ति है। इनके काव्य इनके स्वच्छन्द मन के सहज उद्गार हैं। यही कारण है कि इन्हें स्वच्छन्द काव्य-धारा का प्रवर्तक भी कहा जाता है। इनके काव्य में भावनाओं की तीव्रता, गहनता और तन्मयता को देखकर भारतेन्दु जी ने कहा था-'इन मुसलमान हरिजनन पैकोटिन हिन्दू वारिये।

जयप्रकाश भारती जीवन परिचय

भगवतशरण उपाध्याय जीवन परिचय

रामधारी सिंह दिनकर जीवन परिचय 

राजेन्द्र प्रसाद जीवन परिचय

Tags : रसखान का जीवन परिचय : रसखान दिल्ली के पठान सरदार थे। इनका पूरा नाम सैयद इब्राहीम रसखान था। , रसखान का जीवन परिचय

Go To Home | About Us | Term and Conditions | Disclaimer | Contact us